किस पार्टी के कितने नेताओं पर है आपराधिक मामले दर्ज कहीं जिस पार्टी का आप समर्थन कर रहे हैं वही तो नहीं है आपराधिक मामलों में नंबर वन

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आज देश के पांच राज्य उसी दौर से गुजर रहे हैं.. जहां हिंदू-मुस्लामान… जात-पात…और विकास के नाम पर जनता से वोट मांगे जा रहे हैं। हालांकि इस बार नेताओं का तरिका थोड़ा अलग है। नए भारत में…. यानी की डीजिटल भारत में डीजिटल तरिके से लोगों को अपने पक्ष में वोट डालने के लिए… साम दाम दंड भेद की नीति अपनाएं हुए है।…
कहा भी जाता है… राजनीती में साम-दाम-दंड-भेद सब अपनाया जाता हैं,
जरूरत पड़े तो दुश्मन को भी दोस्त बनाया जाता हैं…
लेकिन जो आज हम आपको बतान जा रहे हैं.. उसे जान कर आप खुद पर अफसोस करेंगे की .. आखिर आपने कैसे नेता को चुना है…
एक ऐसा नेता जिस पर.. बलत्कार, हत्या,, डैकती..महिलाओं के ऊपर अत्याचार जैसे संगीन आरोप लगे हुए है और मुकदमे भी चल रहे हैं..।
उत्तर प्रदेश इलेक्शन वॉच एंड एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स.. ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 के पहले चरण में चुनाव लड़ने वाले 623 में से 615 उम्मीदवारों के शपथ पत्रों का विश्लेषण किया है.. यानी कि उनकी जांच पतड़ाल की है जो कि 58 निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ रहे हैं।
लेकिन…. अब जो हम आपको बताने जा रहे है उसे देखकर आपकी आंखें खुली की खुली रह जाएंगी…. कुल 623 उम्मीदवारों में से 156 उम्मीदवार यानी कि लगभग 25% उम्मीदवार ऐसे हैं जिनके ऊपर आपराधिक मामले दर्ज है।
तो वहीं दूसरी ओर 121 उम्मीदवारों ने अपने ऊपर गंभीर आपराधिक मामले वाले… मामलों की जानकारी निर्वाचन आयोग को दी है यानी कि यह लगभग 20% नेता है जो कि गंभीर अपराधिक मामलों में किसी ना किसी तरीके से लिप्त है।
लिस्ट इतनी लंबी है कि आप देखते-देखते थक जाएंगे लेकिन यह लिस्ट खत्म होने का नाम नहीं लेगी। जिसे देखने के बाद अब आपको लगेगा कि क्या वाकई… आपने इन नेताओं को वोट देकर अपने ऊपर यानी की… जनता के लिए निर्णय लेने के लिए उनकी भलाई के लिए निर्णय लेने के लिए चुना है… जिन पर… खुद के दामन पर…. संगीन अपराधों के दाग लगे हुए हैं।
अब आपको बताते हैं कि सबसे ज्यादा दागी उम्मीदवार किस पार्टी में है… यानी कि इस बार के चुनाव लड़ रहे प्रत्याक्षियों में से… जिन्हें आप वोट देने के लिए सोच रहे हैं सबसे ज्यादा दागी उम्मीदवार किस पार्टी में है।
इस मामले में सबसे पहले नंबर पर आती है समाजवादी पार्टी यानी कि एसपी… उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपना दबदबा रखऩे वाली प्राटी…. प्राटी में पहले चरण के चुनाव के लिए 75% ऐसे उम्मीदवारों को टिकट दिया गया है जिसमें…. जिनके ऊपर क्रिमिनल केस है.. यानी कि आपराधिक मामले दर्ज हैं। तो वहीं 61% ऐसे कैंडिडेट है जिनके ऊपर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं…
इसी तरह से इसके बाद आरएलडी है जिसके उम्मीदवारों पर 52% गंभीर आपराधीक मामले दर्ज है।…. तीसरे नंबर पर बीजेपी आती है…. जिसने अपनी पार्टी में इस बार 51% ऐसे उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने की इजाजत दी है जिनके ऊपर अपराधिक मामले दर्ज है तो वहीं 39% ऐसे उम्मीदवारों को टिकट दिया है जिनके ऊपर गंभीर अपराधिक मामले दर्ज है… इसने बाद नंबर आता है.. INC BSP और AAP का… इन तीनों पार्टियों ने भी अनपी पार्टी से दांगी उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में जनता के ऊपर राज करने के लिए उतारा है।
 इनमें अपराधिक मामलों में कौन-कौन से मामले आते हैं हम आपको वह बता देते हैं… इसमें मामले होते हैं
5 साल या उससे अधिक सजा वाले अपराध…
गैर जमानती अपराध….
चुनाव से संबंधित अपराध…
सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने से संबंधित अपराध….
हमला हत्या अपहरण बलात्कार से संबंधित अपराध भी इसमें शामिल है….
इसके अलावा लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम में उल्लेखित अपराध….
भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम कानून के तहत अपराध
और महिलाओं के ऊपर अत्याचार से संबंधित अपराध भी इस श्रेणी में शामिल किए गए हैं।

 

 

महिलाओं के ऊपर अत्याचार से संबंधित मामले घोषित करने उम्मीदवार वाले की संख्या 12 है है… इन 12 में से एक उम्मीदवार ने अपने ऊपर बलात्कार यानी कि आईपीसी 376 से संबंधित मामला अपने ऊपर घोषित किया है….. अब आप खुद सोचिए जिन प्रत्याशियों के ऊपर इतने संगीत और डरा देने वाले अपराध घोषित है…. क्या वाकई में आप उसे अपना नेता चुनना चाहेंगे
इतना ही नहीं हत्या से संबंधित मामले में घोषित करने वाले उम्मीदवारों की सख्या 6 है.. जबकि हत्या का प्रयास करने वाले मामलों के उम्मीदवारों की संख्या 30 है…
अभी रुकिए….
इब्तिदा-ए-इश्क़ है रोता है क्या, आगे-आगे देखिए होता है क्या
अब आपको उन प्रत्याशियों की सूची दिखाते हैं जिन्होंने अपने ऊपर गंभीर अपराधिक मामलों की जानकारी दी है। यह सूची इतनी लंबी है कि आप देखने के बाद हैरत में पड़ जाएंगे कि आप इनमें से कुछ नेताओं को शायद वोट देने का सोच रहे हैं….अब उसे वोट दे या ना दें…
इनमें से कुछ नेता तो ऐसे हैं जिनके ऊपर एक दो नहीं बल्कि 14 केस दर्ज है… किसी के ऊपर 38 केस तो किसी के ऊपर 18 केस…. किसी के ऊपर 16, 10, 11, याहां तक की 32 मामले तक गंभीर अपराध वाले दर्ज है।
ठीक इसी तरह से अपने ऊपर अपराधिक मामलों को घोषित करने वाले उम्मीदवारों की सूची भी कुछ कम नहीं है… ये लिस्ट भी पहली लिस्ट की तरह ही इतनी लंबी है कि आपको बार-बार यह सोचने पर मजबूर कर देगी कि आप किसे वोट दें और किसे ना दें…. इस लिस्ट में भी किसी के ऊपर 1…किसी के ऊपर 2 ….इस तरह से 1 से लेकर 38 तक.. आपाराधिक मामले दर्ज है।

 

 

हमारी ये रिपोर्ट आपको सिर्फ सजग और जागरूक करने के लिए है…. किसी भी नेता प्रत्याशी या पार्टी को… किसी भी तरह से भावनाएं आहत करना या उनकी छवि को धूमिल करना नहीं है। यह सभी आंकड़े हमने एडीआर यानी कि एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स से लिए है।
इस बात के लिए खुद सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया है कि केंद्र और राज्य के चुनाव स्तर पर राजनीतिक दलों के लिए अनिवार्य है कि वह अपनी वेबसाइट पर लंबित अपराधिक मामले वाले उम्मीदवारों सहित अपराधों की प्रकृति संबंधी विवरण…… जैसे कि आरोप तय किए गए हैं… संबंधित न्यायालय मामला संख्या आदि के बारे में पूरी जानकारी दें। ऐसा इसलिए किया जाना जरूरी है जिससे कि जनता को अपने उम्मीदवार के बारे में सब कुछ पता हो.. उस वह सबसे बेहतर उम्मीदवार को अपना वोट दे सके।
 टिप्पणी करते हुए खुद एडीआर ने अपनी वेबसाइट पर लिखा है कि- उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पहले चरण में उम्मीदवारों के चयन में राजनीतिक दलों पर सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का कोई प्रभाव नहीं पड़ा है… क्योंकि उन्होंने फिर से अपराधिक मामलों वाले लगभग 25% उम्मीदवारों को टिकट देने की अपनी पुरानी प्रथा का पालन किया है। उत्तर प्रदेश के पहले चरण में चुनाव लड़ने वाले सभी प्रमुख दलों ने अपने ऊपर आपराधिक मामले घोषित करने वाले 15% से 75% उम्मीदवारों को टिकट दिए है। सर्वोच्च न्यायालय ने 13 फरवरी 2020 को अपने निर्देशों में विशेष रूप से राजनीतिक दलों को आपराधिक छवि वाले उम्मीदवारों को चुनने… साफ छवि वाले उम्मीदवारों को टिकट नहीं देने के कारण बताने का निर्देश दिया था… अनिवार्य दिशानिर्देशानुसार ऐसे चैयन का कारण संबंधित उम्मीदवार की योग्यता… उपलब्धि और योग्यता के संदर्भ में होना चाहिए।
हाल ही में 2020 में हुए राज्य विधानसभा चुनाव के दौरान देखा गया कि राजनीतिक दलों द्वारा आधारहीन कारण व्यक्ति की लोकप्रियता ..राजनीति से प्रेरित उम्मीदवारों को टिकट देने के कारण नहीं है। स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि राजनीतिक दलों को चुनाव प्रणाली में सुधार करने में कोई दिलचस्पी नहीं है और हमारे लोकतंत्र में कानून तोड़ने वाले उम्मीदवार जीतने के बाद कानून बनाने वाले विधायक बन जाते हैं।
आप भी ऐसे नेता का चुनाव करें जो आपके लिए काम करें…किसी शायर ने खूब कहा है –
अपनी तीजोरी तो हर कोई भरता है… ऐसा नेता चुनो जो देश के लिए कुछ करता है।

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