डिंडौरी म प्र……………… पंचायत चुनाव: बड़े बड़े दिग्गजों की खिसकती जमीन , पुराने खिलाड़ियों को जमीन चटाते मतदाता

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डिंडौरी म प्र……………… पंचायत चुनाव: बड़े बड़े दिग्गजों की खिसकती जमीन , पुराने खिलाड़ियों को जमीन चटाते मतदाता

पंचायत चुनाव अच्छे अच्छे को भारी पड़ जाता है। भ्रष्टाचार और लचर व्यवस्थाओं से नाराज़ मतदाता जिले के दिग्गज नेताओं को जमीन दिखाता नज़र आ रहा है। 25 जून को संपन्न हुए मतदान में अधिकतर पूर्व जनपद और जिला सदस्यों की हालत पतली हो गई तो दर्जनों सरपंच को हार का सामना करना पड़ा।
तीन जिला पंचायत क्षेत्रों में धुरंधर नेताओ को जनता ने निपटा दिया है। गांव गांव में मतदाता नकारा जनप्रतिंधियो को हिल्ले लगाने के मूड ने नज़र आ रहा है। जिसका परिणाम आगे भी जिले के कई दिग्गज नेताओं को झेलना पड़ सकता है।

 

 

 

आगामी दूसरे चरण के मतदान ने सबसे अधिक चर्चित जिला पंचायत का वार्ड क्रमांक 1 है। जिसको लेकर पूरे जिले में नज़र टिकी हुई है। दावा किया जा रहा है कि प्रतिष्ठा बचाने यहां करोड़ों रुपए खर्च किए जा चुके है, उसके बाद भी ऐसे प्रत्याशियों की हालत पतली ही दिखाई दे रही है। जिससे साफ होता है की मतदाता मन बना चुका है और किसी भी प्रलोभन में आने वाला नहीं है। वार्ड क्रमांक 1 से वर्षों से जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर पदस्थ ज्योति प्रकाश धुर्वे मैदान में है जो अपना पूरा जोर आजमा रही है। वहीं पूर्व जिला सदस्य चन्द्रकला परस्ते उन्हें हर तरफ से घेरने की कोशिश कर रही है। वहीं इस सीट पर देववती वालरे और उर्मिला सिंह से जनता को खासी उम्मीद है। दोनों उम्मीदवार स्थानीय मतदाताओं की पसंद बताए जा रहे है। इस सीट पर बन रही स्थितियों में कोई भी गच्चा खा सकता है जो कोई बड़ी बात नहीं है। इस सीट पर प्रतिष्ठा सबसे अधिक ज्योति प्रकाश धुर्वे की दाव पर लगी हुई है जो पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष के साथ साथ पूर्व केबिनेट मंत्री, विधायक और भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री की पत्नी है और वे हर संभव प्रयास में है जीत हासिल कर एक बार फिर से जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर कब्ज़ा ठोका जाए पर जनता का मिजाज भापना आज के हालात में तो मुश्किल नजर आ रही है।

 

 

 

जनता है नाराज :

पूरे जिले में पंचायतों की व्यवस्थाओं से आम जनता जमकर नाराज है। जिले में पंचायती राज में फलते फूलते
माफिया और सप्लायरो की करतूत से हर कोई नाराज है।

पंचायती राज व्यवस्था और ग्राम स्वराज के तहत कमजोर तबके के लोगों को सिर्फ नाम की सत्ता सौंपी जा सकी है। इसका उपयोग तो वास्तव में माफिया और दबग ही कर रहे है। जिले में ऐसा माहौल पिछले सालों से देखा जा रहा है। ग्राम की सरकार और पंचायती राज में भ्रष्टाचार का बोलबाला है। खुलेआम सरकारी खजाना लूटा जा रहा है। जिस पर न कोई कार्यवाही और न कोई सजा, अफसरशाही और चुने हुए जनप्रतिनिधियों की ख़ामोशी ने साबित कर दिया है कि ये जिम्मेदार व्यवस्था सुधारने में नकारा साबित हो चुके है। जिसके पीछे का कारण या तो ये अक्षम है या फिर बिक चुके है। पंचायती राज व्यवस्था में मचा भ्रष्टाचार का हाहाकार और आमजन की खुली उपेक्षा का परिणाम है कि आज लोग तनाम मठाधीशों को सबक देने का मन बना चुके है। जिसका नमूना शहपुरा और मेहंदवानी क्षेत्र से प्राप्त चुनाव परिणामों में साफ दिखाई दे रहा है। सड़क, पुलिया, आवास योजना से लेकर शौचालय निर्माण तक की राशि डकारे जाने, मुर्दों के नाम से मजदूरी भुगतान, जिंदा हितग्राहियों को मृत घोषित किए जाने जैसे गंभीर मामलों में लोग शिकायत लेकर भटकते फिरते है तब भी कार्यवाही के नाम पर सन्नाटा और जनपद, जिला के प्रतिनिधियों का मौन कहीं न कहीं अब मतदाताओं के निशाने पर है। जनपद, जिला पंचायत से लेकर जनसुनवाई तक गांव के लोग कई चक्कर काटते है पर क्या मजाल की रोजगार सहायक के खिलाफ भी कोई कार्यवाही करवा पाए। गांव गांव में भ्रष्टाचार, विकास के नाम पर खुला खिलवाड़ तब भी कभी कोई जिम्मेदार जनप्रतिनिधि सामने आकर जनता के साथ खड़ा नहीं हुआ। फर्जी बिलो और कथित सप्लायरों से परेशान जनता अब उन्हें संरक्षण देने वालों को करारा जवाब देने के मूड में है।

 

 

 

 

अमृत सरोवर से निकला विष

पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग की फिलहाल में जारी “अमृत सरोवर योजना” में कई लाख रुपयों के निर्माण मनमाने ढंग से स्थान चयन कर निर्माण एजेंसी बना रही है। लगातार मीडिया में ख़बरें आने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं की गई। ग्रामीणों की शिकायतों पर न तो अधिकारियों को निरीक्षण की फुर्सत है न चुने हुए उन जनप्रतिनिधियों को जो पिछले कई सालों से जनता का प्रतिनिधित्व कर रहे है। इन अव्यवस्थाओ, आमजन की अपेक्षा और भ्रष्टाचार से पीड़ित ग्रामीणजन की हताशा अब नए विकल्प और नए चेहरों की तलाश में है जो पुराने मठाधीशों को आगामी चुनाव के दौरान भारी पड़ सकता है। चुनाव का अर्थ ही सत्ता परिवर्तन है और ऐसे बहुत कम चेहरे चुनाव मैदान में है जिन्होंने पिछले कार्यकाल में आमजन का दिल जीता हो जिसके चलते पुराने दिग्गजों के लिए पंचायत चुनाव भारी पड़ता दिखाई दे रहा है। बड़ी उलटफेर और बदलाव के संकेत जनता दे रही है आगे यह स्थिति 1 जुलाई के मतदान के बाद पूरी तरह से साफ हो जाएगी कि आखिर आम
मतदाता के मन में क्या है।

इंडियन टीवी न्यूज़ संवाददाता मो0 सफर ज़िला डिंडोरी मध्य प्रदेश

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