रायपुर :- किसान विरोधी कृषि नीति कारण प्रदेश में खाद बीज का संकट प्रमोद कुमार शर्मा, विधायक बलोदाबाजार

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रायपुर :- किसान विरोधी कृषि नीति कारण प्रदेश में खाद बीज का संकट प्रमोद कुमार शर्मा, विधायक बलोदाबाजार

 

 

 

(सौरभ यादव)तिल्दा नेवरा,:- विधायक प्रमोद कुमार शर्मा ने कहा सरकार की किसान विरोधी कृषि नीति कारण प्रदेश में खाद और बीज की कमी हुई है जिसका खामियाजा छत्तीसगढ़ के किसानों को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने कहा पूरे प्रदेश में खाद और बीज की भीषण कमी व्याप्त है।सहकारी सोसाइटियों में खाद उपलब्ध ही नहीं है। ओपन मार्केट में खाद तीन गुना अधिक कीमत पर मिल रही है।किसानों को 1200 रुपए का डीएपी लगभग 2000 रुपये में खरीदना पड़ रहा है। खाद के लिये किसान घंटों सोसाइटी में लाइन में खड़े हो रहे हैं वहीँ मुनाफाखोर चांदी काट रहे हैं। सहकारी समितियों के माध्यम से राज्य सरकार गुणवत्ताहीन वर्मी कंपोस्ट खाद लेने के लिए मजबूर कर रही है। वर्मी कंपोस्ट के नाम पर किसानों को मिट्टी, कंकड़, पत्थर, पॉलिथीन आदि अमानक मिला हुआ खाद दिया जा रहा है, ऐसे में किसानों की फसल पर असर पड़ रहा है। खरीफ सीजन में किसान खेतों में खेती के लिए समय न देकर खाद के लिए समितियों के चक्कर लगा रहे हैं, हताश होकर दर दर भटक रहे हैं । श्री शर्मा ने कहा खरीफ सीजन के पहले खाद के संकट के साथ साथ, किसानों को अघोषित बिजली कटौती की दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। छत्तीसगढ़ के किसानों के हिस्से की बिजली को छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार अन्य राज्यों को दे रही है जो प्रदेश के किसानों के साथ सरासर अन्याय और कृषि समस्याओं को लेकर राज्य सरकार की असंवेदनशीलता का परिचायक है।विधायक प्रमोद कुमार शर्मा ने कहा धान का कटोरा कहे जाने वाला छत्तीसगढ़ राज्य, कृषि बाहुल्य राज्य है और ऐसे में राज्य के अन्नदाता का ही त्रासदी में होना, राज्य सरकार की विफलता और कुप्रबंधन का साक्ष्य है। इस हेतु , किसानों को राहत देने निम्नलिखित चार सूत्रीय मांगों को विधायक प्रमोद कुमार शर्मा ने शासन के समक्ष ये मांगें रखी है :

 

 

 

१) सहकारी समितियों में तत्काल खाद और बीज की उपलब्धता सुनिश्चित की जाये ।
२) किसानों को वर्मी कम्पोस्ट खाद लेने की अनिवार्यता को खत्म किया जाए।
३) रासायनिक खाद की आपूर्ति में कमी को देखते हुए यूरिया, डीएपी तथा पोटाश की बिक्री को खुले बाजार में प्रतिबंधित किया जाए। इन तीनों प्रकार के खाद को सिर्फ सहकारी समितियों के माध्यम से सभी किसानों को सरकार द्वारा निर्धारित मूल्य पर दिया जाए। खेती-किसानी के लिए बिजली आपूर्ति को अतिआवश्यक सेवा की श्रेणी में रखा जाए और चौबीस घंटे बिजली सुनिश्चित की जाए।

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